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*शार्टेज होने का हवाला देकर दोगुनी कीमतों पर धड़ल्ले से चल रही बिक्री,,खाद्य विभाग का दावा निकला खोखला,,आज पुलिस ने खाद्य से भरे ट्रक किया जप्त.........* *खबर-क्रान्ति से गुफरान सिद्दीकी(सोनू)*

सूरजपुर(विशेष)-01-जुलाई-2022-(गुफरान सिद्दीकी) जिस राज्य के मुख्यमंत्री व सरकार दोनों कि सर्वोच्च प्राथमिकता में कृषि व किसान शामिल होने के साथ ही सशक्तिकरण के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है,उसी प्रदेश में सूरजपुर जिले में प्रशासनिक अधिकारियों कि उदासीनता सें किसान खेती के लिए अहम जरूरत रसायनिक खाद पर तमाम शासकीय अनुदान के वावजूद कृत्रिम शार्टेज से जुड़ी अफवाहों के जद में आकर पहले सहकारी समितियों में खाद उपलब्धता सुनिश्चित करने कि पतासाजी करता है तो शुरुआत दौर में शार्टेज से जुड़ी बातें सुनकर मजबूरन दोगुनी कीमतों पर निजी खाद बिक्रेताओ के दुकानों से खरीदने के दरम्यान ही उपलब्धता से पूर्व शिकायत दर्ज नहीं कराने से जुड़ी शर्तों और खेती में देरी होने पर उत्पादन में पड़ने वाले प्रभाव से बचाव के लिए चुपचाप शोषित हो रहा है। वर्षा ऋतु के आते ही किसानों के मुस्कुराहट देखने को भी मिल रहा है, किसान बड़े पैमाने में खेती की तैयारी जुट गए है । किसानों को सबसे बड़ी परेशनि आन खडा हुई है वो है खाद्य, यूरिया,डी.ए.पी पोटाश की भारी किल्लत से किसान अभी के समय में खाद्य के आवंटन ना मिलने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर साफ दिखाई दे रहा हैं । *क्या प्रदेश में भी खाद की कीमतों में लगेगी आग, यूरिया-डीएपी के कैसे आसमान छू रहे हैं दाम? जानिए* पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आए दिन इजाफा हो रहा है। इसकी वजह यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग है, जिसके चलते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ गई हैं। लेकिन, इसके चलते खाद की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी कई गुना इजाफा हो गया है, दुकान दार इसी खाद्य, यूरिया, डीएपी, पोटास के बाजार से ओने-पौने दामों पर किसान मजबूर है , लेकिन अपनी चिंता व दुखड़ा किस्से बताए ना अधिकारी सुन रहे है ना कर्मचारियों के कान में जूं रेंग रहा है । भारत में अभी जिस रेट पर किसानों को यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरक जिस भाव से मिल रही हैं वो दोगुने,तीन गुना रेत, खरीद कर फसल में उपयोग करने में बाध्य है । �यह है कारण.........�� दरअसल धान का कटोरा बतौर क्षेत्र कि पहचान क्षेत्र में सर्वाधिक रूप से हर स्तर का किसान खरीफ फसल में धान कि बोनी वृहद स्तर पर करता है। जिसमें उत्पादन के लिए रसायनिक खादों का अहम हिस्सा होने से मानसून कि दस्तक के बाद एक साथ खाद खरीदने के लिए किसानों का हूजूम उमड़ता है। इससे जहां सहकारी समितियों में खाद आपूर्ति अनुरूप उपलब्ध नहीं होने के पीछे का मुल कारण तो खुलकर प्रशासनिक अमला ही हकीकत बता सकता है। किसान व आमजन केवल डीमांड लेटर जाने व रेलवे रेक लगने से जुड़ी कई तारीख मिलने के बाद भी उपलब्ध नहीं होने पर निजी दुकानदारों से संपर्क कर जरूरत मुताबिक खाद खरीदने कि मजबूरी होने से खामोश रहकर अपनी जरूरत पूरी कर खेती में जुट जाता है। वहीं दूसरी तरफ इस खेल में करीब करीब पूरी खरीदी बिक्री नगद राशि में होने से महज दो माह के दरम्यान करोड़ों रुपए का पूरा व्यवसाय होने से सभी निगरानी रखने के जिम्मेदार अफसर व जिला प्रशासन से जुड़े कुछ अफसरों कि अप्रत्यक्ष रूप से खाद बिक्री करने वाले थोक से लेकर निजी दुकानदारों से कमीशन राशि तय होने से किसानों के साथ शोषण से जुड़ा मामला केवल सियासत व समाचारों कि सुर्खियों में शामिल होकर जस का तस हाल में पड़ा हुआ है ? *केवल पत्राचार और कमी दूर करने में मशगूल होकर कालाबाजारी पर करते थे खारिज लेकिन पुलिस टीम ने पकड़ा तो लाखों का खाद कालाबाजारी में हुआ जप्त......* जिला प्रशासन खाद कि कमी होने पर अपनी तरफ से पत्राचार करने के अलावा बाजार में कालाबाजारी पर नकार दिया जाता रहा लेकिन 30 जून को कोतवाली पुलिस टीम रात्रि गश्त के दरम्यान मुखबिर से खाद अफरातफरी संबंधित सूचना पर ग्राम पंचायत सपकरा में घेराबंदी कर ट्रक को रूकवाने उपरांत चालक संजय सिदार पिता स्व. महाबली उम्र 28 वर्ष ग्राम गोपालपुर से खाद परिवहन व खरीदी-बिक्री से संबंधीत दस्तावेज की मांग करने पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने कि वजह से आरोपीत के विरूद्व धारा 3, 7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए करीब 200 बोरी रासायनिक खाद कुल 10 मि.टन कीमत करीब 3,38,420 रूपये एवं परिवहन में प्रयुक्त ट्रक क्रमांक सीजी 15 सीवाई 4135 जप्त कर खाद के खेल में अब पुलिस विभाग कि दखल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने पर खलबली मच गई है।�